मासिक कृष्ण जन्माष्टमी — महत्व, कथा और परंपरा
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी हर कृष्ण-पक्ष अष्टमी, विशेषतः रोहिणी योग में रखा जाने वाला ‘लघु’ व्रत है। जिस मास में यह पड़ती है, उसी की ऋतु-छटा इसे रंग देती है, श्रावण की वर्षा, कार्तिक के दीप या माघ की सिहरन सबमें बाल-गोपाल का उल्लास घुल जाता है। स्नान कर पीले वस्त्र व तुलसी-माला पहनें, ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ जपते हुए उपवास का संकल्प लें। दूध-दही, माखन-मिश्री व पंचामृत से अभिषेक करें; चन्दन, दीप, तुलसी-दल अर्पित करें। 108 बार द्वादशाक्षर मंत्र या गीता अध्याय 12 पढ़ें। अर्ध-रात्रि शंख-घंट संग आरती उतारें, नन्द-उत्सव मनाएँ। अगली भोर तुलसी-जल से आचमन कर फलाहार या पंचामृत से व्रत खोलें। माना जाता है कि यह उपवास संतान-सुख, बुद्धि-बल, पारिवारिक शांति और मासिक कृष्ण-भक्ति का संचार करता है।